in , ,

आंध्र प्रदेश में होंगे 5 उपमुख्यमंत्री |

आंध्र प्रदेश के नए सीएम जगनमोहन रेड्डी ने अपनी टीम में 5 उपमुख्यमंत्रियों को शामिल करने का फैसला लिया है। देश में यह पहला मौका है, जब 5 उपमुख्यमंत्री सरकार का हिस्सा होंगे। शनिवार को जगनमोहन की कैबिनेट के 25 मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।

  • देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपमुख्यमंत्री हैं। हालांकि गोवा और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां दो-दो उपमुख्यमंत्री हैं
  • डेप्युटी सीएम के पदनाम से ऐसा लगता है कि जैसे इस पद पर बैठे शख्स को अन्य मंत्रियों से अधिक अधिकार होंगे, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है
  • असल में इनकी नियुक्ति राजनीतिक हितों को साधने के लिए की जाती है, जब गठबंधन को साधना होता है या फिर एक से अधिक दिग्गज नेताओं को
नई दिल्ली
आंध्र प्रदेश के नए सीएम जगनमोहन रेड्डी ने अपनी टीम में 5 उपमुख्यमंत्रियों को शामिल करने का फैसला लिया है। देश में यह पहला मौका है, जब 5 उपमुख्यमंत्री सरकार का हिस्सा होंगे। शनिवार को जगनमोहन की कैबिनेट के 25 मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। जगनमोहन ने 5 उपमुख्यमंत्रियों को शामिल करने को लेकर कहा है कि इसके जरिए राज्य के मुख्य समुदायों दलित, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।आइए जानते हैं संविधान में क्या हैं उपप्रधानमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के अधिकार और कैसे होती है इनकी नियुक्ति…
14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डेप्युटी सीएम
फिलहाल देश के 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपमुख्यमंत्री हैं। हालांकि गोवा और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां दो-दो उपमुख्यमंत्री हैं। अब आंध्र प्रदेश सभी से आगे निकल जाएगा और वहां 5 डेप्युटी सीएम होंगे। यह अपने आप में एक रेकॉर्ड होगा।नहीं होता कोई संवैधानिक अधिकार
डेप्युटी सीएम के पदनाम से ऐसा लगता है कि जैसे इस पद पर बैठे शख्स को अन्य मंत्रियों से अधिक अधिकार होंगे, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। मुख्यमंत्री को सभी बराबर के मंत्रियों में प्रथम माना जाता है, लेकिन संविधान में डेप्युटी सीएम को लेकर ऐसा कोई जिक्र नहीं है और न ही उसे कोई अलग अधिकार दिए गए हैं। डेप्युटी सीएम सीधे तौर पर कैबिनेट के अन्य मंत्रियों की तरह ही होते हैं और उनके भी निश्चित विभाग होते हैं।

डेप्युटी सीएम से सधती है सिर्फ राजनीति
अब सवाल यह उठता है कि यदि डेप्युटी सीएम के पास बहुत ज्यादा अधिकार नहीं होते हैं तो फिर उनकी क्या जरूरत है? असल में इनकी नियुक्ति राजनीतिक हितों को साधने के लिए की जाती है। आमतौर पर ऐसे राज्यों में जहां एक से अधिक कद्दावर नेता सीएम की रेस में होते हैं या फिर जहां गठबंधन सरकारें होती हैं, वहां इनकी नियुक्ति की जाती है।

डेप्युटी पीएम से हुई इसकी शुरुआत
असल में डेप्युटी सीएम का यह सिलसिला इतिहास में झांकें तो एक डेप्युटी पीएम से शुरू होता है। हालांकि सरदार पटेल, मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम जैसे दिग्गज नेताओं को भी उपप्रधानमंत्री का दर्जा दिया गया था, लेकिन 1989 में पहली बार हरियाणा के दिग्गज नेता देवीलाल ने उपप्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। देवीलाल के डेप्युटी पीएम के तौर पर शपथ लेने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। इस पर केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि यह पद सिर्फ नाम के लिए है और देवीलाल अन्य तमाम मंत्रियों की तरह ही होंगे। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 9 जनवरी, 1990 को टिप्पणी की थी कि देवीलाल के पास पीएम की कोई शक्ति नहीं है।

कौन था पहला डेप्युटी सीएम
देवीलाल के उपप्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद देश में डेप्युटी सीएम का सिलसिला शुरू हुआ। पहली बार कर्नाटक में 1992 में पूर्व विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा डेप्युटी सीएम बने। यही नहीं पहली बार दो मुख्यमंत्री भी कर्नाटक में ही 2012 में बनाए गए और फिर तो अन्य तमाम राज्यों में भी यह व्यवस्था लागू होने लगी। पिछले साल कर्नाटक हाई कोर्ट ने उपमुख्यमंत्री की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है।

What do you think?

0 points
Upvote Downvote

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading…

0

Comments

0 comments

ममता – जय हिंद, जय बांग्ला

PM KISAN योजना में तेजी के लिए सरकार लाएगी ई-रजिस्ट्रेशन