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एक्शन में मोदी सरकार: नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के पद संभालने के कुछ देर बाद ही नई एजुकेशन पॉलिसी बना रही कमेटी ने इसका ड्राफ्ट सौंप दिया है.

मोदी सरकार के कार्यभार संभालने के साथ ही एजुकेशन पॉलिसी में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के पद संभालने के कुछ देर बाद ही नई एजुकेशन पॉलिसी बना रही कमेटी ने इसका ड्राफ्ट सौंप दिया है. इस ड्राफ्ट के तहत 12वीं तक की कक्षाओं के लिए 5+3+3+4 का फार्मूला बनाया गया है. इस फॉर्मूले के तहत छात्रों को 12वीं क्लास तक की पढ़ाई पर जोर दिया गया है.
स्कूल एजुकेशन के लिए 5+3+3+4 डिजाइन लागू किया जाएगा. इसके तहत पांच साल का फाउंडेशन कोर्स होगा, जिसमें कक्षा 1और 2 की पढ़ाई को भी शामिल किया जाएगा. इसे प्री प्राइमरी स्कूल नाम दिया गया है. इसके बाद प्रिपेरटरी स्टेज के तहत कक्षा 3, 4 और 5 की पढ़ाई होगी. इसके बाद तीन कक्षाएं 6, 7 और 8 मिडिल स्टेज में रखी गई है. आखिर में चौथा स्टेज कक्षा 9, 10, 11 और 12 का होगा.

पांचवीं तक मातृभाषा में ही पढ़ना अनिवार्य होगा!
नई एजुकेशन पॉलिसी में बच्चों को प्री-प्राइमरी से लेकर कम से कम पांचवीं तक मातृभाषा में ही पढ़ना अनिवार्य किया जा सकता है. नई एजुकेशन पॉलिसी में प्री-स्कूल और पहली क्लास में बच्चों को तीन भारतीय भाषाओं के बारे में भी पढ़ाने पर जोर दिया गया है. इसी के साथ तीसरी क्लास तक मातृभाषा में ही लिखने और उसके बाद दो और भारतीय भाषाएं सीखने के बारे में कहा गया है. अगर कोई विदेशी भाषा पढ़ना और लिखना चाहता है तो उसे तीन भारतीय भाषाओं के बाद चौथी भाषा के तौर पर सीखा जा सकता है.

प्राइवेट स्कूलों को फीस तय करने की मिले आजादी
नई एजुकेशन पॉलिसी के ड्राफ्ट में सुझाव दिया गया है निजी स्कूलों को फीस तय करने की आजादी दी जाए. हालांकि इसमें मनमाने तरीके से फीस न बढ़ाने जाने का भी सुझाव दिया गया है. नई शिक्षा नीति के तरह मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किए जाने पर जोर दिया गया है.
बता दें कि मौजूदा शिक्षा नीति 1986 में तैयार हुई थी और 1992 में इसमें संशोधन हुआ. नई शिक्षा नीति 2014 के आम चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी के घोषणा-पत्र का हिस्सा थी.

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