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कोलकाता मामला

आमने-सामने CBI और पुलिस, जानिए क्या है पूरा मामला

सारदा स्कैम 2500 करोड़ रुपये का है, रोज वैली स्कैम 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। आरोपियों के सत्ताधारी टीएमसी से लिंक पाए गए हैं। कंपनियों ने आकर्षक ब्याज का लालच देकर निवेशकों को अपने जाल में फंसाया। मैच्योरिटी के बाद जमाकर्ता अपना रिटर्न लेने पहुंचे तो कंपनियों ने पैसे देने से मना कर दिया।

कोलकाता
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में रविवार को हाई वोल्टेज ड्रामा जारी है, जहां पुलिस और सीबीआई आमने-सामने आ गए। सारदा चिटफंड घोटाले में जांच करने पहुंची सीबीआई की टीम को कोलकाता पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यही नहीं पुलिस भी सीबीआई दफ्तर से पांच अधिकारियों को हिरासत में लेने पहुंच गई। यह पूरा मामला चिटफंड घोटाले से जुड़ा हुआ है, आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला-

सारदा स्कैम करीब 2500 करोड़ रुपये का है और रोज वैली स्कैम करीब 17,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ही मामलों में आरोपियों के कथित तौर पर सत्ताधारी टीएमसी से लिंक पाए गए हैं। इन दोनों ही चिटफंड घोटालों की जांच सीबीआई कर रही है। इस मामले में बीती 11 जनवरी को सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम की पत्नी नलिनी चिदम्बरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।

रोज वैली ग्रुप चिटफंड घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय और तापस पॉल को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है। सीबीआई ने रोज वैली के अध्यक्ष गौतम कुंदू और तीन अन्य पर आरोप लगाया था कि उन्होंने देशभर में निवेशकों को 17,000 करोड़ रुपये की चपत लगाई है। वहीं सारदा के चेयरमैन सुदीप्त सेन हैं। सेन पर आरोप है कि उन्होंने कथित फ्रॉड करके फंड का गलत इस्तेमाल किया।

अधिकारियों ने बताया कि इन चिटफंड कंपनियों ने आकर्षक ब्याज का लालच देकर निवेशकों को अपने जाल में फंसाया। मैच्योरिटी के बाद जब जमाकर्ता अपना रिटर्न लेने पहुंचे तो कंपनियों ने पैसे देने से मना कर दिया। आखिरकार इन कंपनियों ने अपनी दुकानों और दफ्तरों को बंद कर दिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इन मामलों को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था।

सारदा चिटफंड स्कैम
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट। इन स्कीम के जरिए भोले भाले जमाकर्ताओं को लुभाने की कोशिश हुई और उनसे वादा किया गया कि बदले में जो इनसेंटिव मिलेगा वो प्रॉपर्टी या फॉरेन टूर के रूप में होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 से 2012 की ग्रुप की समरी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ग्रुप की चार कंपनियों ने अपनी पॉलिसियां जारी करके 2459 करोड़ रुपये को ठिकाने लगाया है।

क्या होता है चिटफंड
चिट फंड सेविंग और उधार लेने दोनों का ऑप्शन है। अगर आप बोली नहीं लगाते तो यह आपके लिए आरडी की तरह होगा। चिट टर्म की समाप्ति पर आपको आपका पैसा मिल जाएगा। इसमें रिटर्न का कोई फिक्स फॉर्म्युला नहीं होता। चिटफंड तीन तरह की सुविधाओं का मिश्रण होता है। यह पर्सनल लोन भी है, आरडी भी है और किटी पार्टी भी। चिटफंड उधार लेने और बचत करने का एक परंपरागत तरीका है। जैसे कि किटी पार्टी में होता है, इसके सभी सदस्य हर महीने कुछ निश्चित रकम डालते हैं और महीने के अंत में कोई एक सदस्य पूरी रकम ले जाता है। जब तक कि सभी सदस्यों को पैसा नहीं मिल जाता, यह प्रक्रिया हर महीने दोहराई जाती है। इसमें अंतर केवल यह होता है कि किटी पार्टी में जिस सदस्य को रकम मिलेगी, उसका चुनाव ड्रॉ के जरिए होता है, जबकि चिटफंड में इसका फैसला नीलामी से होता है। जो सदस्य सबसे कम बोली लगाता है, उसे इकट्ठी हुई रकम मिल जाती है। बाकी रकम को सभी सदस्यों के बीच बांट दिया जाता है।

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