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भारत रत्न

देश का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वालों की संख्या 48 हो गई है ।

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की शुरुआत 1954 से हुई। अब तक विभिन्न क्षेत्रों की 42 हस्तियों को भारत रत्नके सम्मान से नवाजा जा चुका है। पहला भारत रत्न का सम्मान देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को 1954 में प्रदान किया। देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न पाने वालों की सूची में तीन नाम और जुड़ गए हैं. सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, समाजसेवी नानाजी देशमुख और गायक भूपेन हज़ारिका को यह सम्मान देने का ऐलान किया है. इन तीनों हस्तियों को मिलाकर अब तक भारत रत्न पाने वाली हस्तियों की संख्या 48 हो गई है. इनमें से ज़्यादातर के बारे में हम जानते हैं. लेकिन कुछ दिग्गज ऐसे भी हैं जो यह सम्मान पाने के बाद भी ज़्यादातर लोगों के लिए अनसुने नाम ही होंगे.

भगवान दास

डॉ भगवान दास स्वंतत्रता संग्राम सेनानी होने के साथ-साथ सम्मानित शिक्षाशास्त्री और दार्शनिक भी थे. वे कई संस्थाओं के संस्थापक भी रहे. 12 जनवरी, 1869 को वाराणसी में जन्मे भगवानदास ने अपने जीवनकाल में हिंदी और संस्कृत भाषा में 30 से भी अधिक पुस्तकों का लेखन किया. उन्होंने सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना में अहम भूमिका निभाई. इस संस्थान को हम बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से जानते हैं.

1930 के ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ में भाग लेने के चलते भगवान दास को जेल हुई. इससे पहले वे ‘असहयोग आंदोलन’ में भी सक्रिय रहे और कांग्रेस के एक प्रमुख नेता के रूप में उभरे. 1920 के दशक की शुरुआत में हुए इस आंदोलन के समय वे काशी विश्वविद्यालय के कुलपति थे. इसलिए तमाम व्यस्तताओं के बावजूद वे पढ़ने-पढ़ाने के काम में लगातार लगे रहे. 1935 के बाद भगवान दास सक्रिय राजनीति से दूर रहने लगे. अब उन्होंने अपना समय भारतीय दर्शन और धर्म अध्ययन के साथ लेखन कार्य में लगाया. आज़ादी के बाद उनसे भारत की नई सरकार में महत्वपूर्ण पद संभालने का अनुरोध भी किया गया, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया. 1955 में भगवान दास को भारत रत्न दिया गया. तीन साल बाद 18 सितंबर, 1958 को उनका निधन हो गया.

धोंडो केशव कर्वे

भारत में महिला उत्थान के लिए काम करने वाले धोंडो केशव कर्वे को लोग ‘महर्षि कर्वे’ भी कहते थे. 18 अप्रैल, 1858 को महाराष्ट्र के मुरुड कस्बे में जन्मे इस महान समाज सुधारक ने विधवा महिलाओं के उत्थान और महिला शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया. इसके लिए उन्होंने अपने ही समाज से द्वेष मोल लिया 1891 में पत्नी के निधन के दो साल बाद बाद धोंडो केशव कर्वे ने अपने एक मित्र की विधवा बहन से विवाह किया था. उनके इस क़दम से महाराष्ट्र के समाज, ख़ास तौर पर उनकी अपनी जाति में उनके ख़िलाफ़ रोष पैदा हो गया. समाज की इसी प्रतिक्रिया ने उन्हें उपेक्षित विधवा महिलाओं के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया. धोंडो केशव कर्वे ने धन इकट्ठा कर विधवाओं के पुनर्विवाह कराए, उनके और अनाथ बालिकाओं के लिए आश्रम, विद्यालय और विश्वविद्यालय शुरू किए. महर्षि कर्वे ने ग्रामीण शिक्षा के प्रसार के लिए भी चंदा इकट्ठा किया और अलग-अलग गांवों में 50 से भी अधिक प्राइमरी विद्यालयों की स्थापना की. उनके प्रयासों से उन्हीं के द्वारा शुरू किए गए महिला विश्वविद्यालय को 1951 में राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला. भारत सरकार ने उन्हें 1955 में पद्म भूषण और 1958 में भारत रत्न से नवाज़ा. नौ नवंबर, 1962 को 104 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया.

पांडुरंग वामन काणे

सात मई, 1880 को महाराष्ट्र में ही एक और ‘भारत रत्न’ का जन्म हुआ था. रत्नागिरी ज़िले के दापोली गांव में पैदा हुए डॉ पांडुरंग वामन काणे संस्कृत भाषा के विद्वान और भारतीय प्राच्य विद्या के महारथी (इंडोलॉजिस्ट) थे. एक ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण संस्कृत भाषा डॉ काणे को विरासत में मिली. वे कुशाग्र बुद्धि वाले व्यक्ति थे जो धर्म, भाषा व संस्कृति पर किए गए अपने शोधों के लिए विख्यात रहे.1901 में स्नातक हुए डॉ पांडुरंग वामन काणे को अपनी विद्वता के लिए कई सम्मान मिले. 1942 में तत्कालीन सरकार ने उन्हें ‘महामहोपाध्याय’ की उपाधि से नवाज़ा गया. 1959 में उन्हें ‘भारतीय प्राच्य विद्या’ का ‘राष्ट्रीय शिक्षक’ नियुक्त किया गया.पांडुरंग वामन कामणे ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय विपुल साहित्य रचना में लगाया. उन्होंने उदार धर्म की व्याख्या की. वे छुआछूत के विरोधी और अतंर्जातीय व विधवा विवाह के समर्थक थे. वे परिस्थिति के हिसाब से महिलाओं के तलाक़ के अधिकार के भी समर्थक रहे. पांडुरंग वामन काणे का तर्क था कि समय के साथ धर्म का भी परिवर्तन होना चाहिए. 1963 में सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 18 अप्रैल, 1972 को उनका निधन हो गया.

चिदंबरम सुब्रमण्यम

चिदंबरम सुब्रमण्यम एक चर्चित राजनेता और स्वाधीनता सेनानी थे. भारत को खाद्यान्न उत्पादन में स्वावलंबी बनाने में उनका योगदान अहम माना जाता है. उन्हें ‘हरित क्रांति का जनक’ भी कहा जाता है.

चिदंबरम सुब्रमण्यम का जन्म 30 जनवरी, 1910 को तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे चेन्नई चले गए. वहां उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से भौतिक विज्ञान में बीएससी की. बाद में उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. उन दिनों में देश में स्वतंत्रता संग्राम चरम पर था. वे खुद को इससे अलग नहीं रख पाए और सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ गए. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्होंने हिस्सा लिया और जेल गए. आज़ादी के बाद वे संविधान सभा के सदस्य चुने गए. 1962 में चिदंबरम सुब्रमण्यम लोकसभा पहुंचे और केंद्रीय इस्पात व खनन मंत्री बने. बाद में वे खाद्य व कृषि मंत्री बनाए गए. इसी दौरान उन्होंने हरित क्रांति के लिए काम किया.बहुत कम लोग जानते हैं कि श्वेत क्रांति में भी चिंदबरम सुब्रमण्यम अहम भूमिका निभा चुके हैं. यह सुब्रमण्यम ही थे जिन्होंने वर्गीज कुरियन को ‘नेशनल डेरी डेवलपमेंट बोर्ड’ का अध्यक्ष बनाया था. उन्हें 1998 में भारत रत्न से नवाज़ा गया. सात नवंबर, 2000 को चेन्नई में उन्होंने अंतिम सांस ली.

गोपीनाथ बोरदोलोई

10 जून, 1890 को असम के नौगांव जिले में जन्मे गोपीनाथ बोरदोलोई को ‘आधुनिक असम का निर्माता’ कहा जाता है. वे एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और असम के पहले मुख्यमंत्री थे. बीए, एमए और एलएलबी करने के बाद गोपीनाथ ने 1917 में वकालत शुरू की. लेकिन वे ख़ुद को स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल होने से नहीं रोक पाए. उन्होंने कामकाज छोड़ कर गांधीजी के नेतृत्व में तमाम आंदोलनों में हिस्सा लिया और जेल गए.

गोपीनाथ बोरदोलोई 1932 में गुवाहाटी नगरपालिका के बोर्ड के अध्यक्ष चुने गए. उस समय असम एक पिछड़ा प्रदेश था. गोपीनाथ ने वहां विश्वविद्यालय और हाई कोर्ट खुलवाए. उनके कार्यों से प्रभावित असम की जनता ने उन्हें ‘लोकप्रिय’ की उपाधि दी थी. 1939 में वे यहां के मुख्यमंत्री बने. उसके बाद उन्होंने ताउम्र ख़ुद को असम के लिए समर्पित कर दिया.कहा जाता है कि यह गोपीनाथ बोरदोलोई के प्रयासों का नतीजा था जो आज़ादी के समय असम भारत से कट कर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बना. अंग्रेज़ों ने भारत को विभिन्न भागों में बांटने के लिए ‘ग्रुपिंग सिस्टम’ योजना बनाई थी. लेकिन गोपीनाथ के होते असम को लेकर उनकी यह चाल कामयाब नहीं हो पाई. गोपीनाथ असम में इतने लोकप्रिय हुए कि लोग उन्हें ‘शेर-ए-असम’ कहने लगे. पांच अगस्त, 1950 को दुनिया को अलविदा कहने से पहले गोपीनाथ बोरदोलोई ने असम के लिए जो किया, उसे सम्मान देते हुए 1999 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

भारत रत्न विजेता की सूची

प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को भारत रत्न के ऐलान के बाद देश का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान पाने वालों की संख्या 48 हो गई है

1. 1954 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन (देश के दूसरे राष्ट्रपति), जन्म 5 सितम्बर 1888, निधन 17 अप्रैल 1975 
2. 1954 में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अंतिम गवर्नर जनरल). जन्म 10 दिसम्बर 1878, निधन 25 दिसम्बर 1972 
3. 1954 में डॉ. चन्द्रशेखर वेंकट रमन (नोबेल पुरस्कार विजेता, भौतिकशास्त्री) जन्म 7 नवम्बर 1888, निधन 21 नवम्बर 1970
4. 1955 में डॉ. भगवान दास (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लेखक) जन्म 12 जनवरी 1869, निधन 18 सितम्बर 1958
5. 1955 में सर डॉ. मौक्षगुंडम विश्वेश्वरय्या (सिविल इंजीनियर, मैसूर के दीवान), जन्म 15 सितम्बर 1861, निधन 14 अप्रैल 1962
6. 1955 में पं. जवाहरलाल नेहरू (प्रथम प्रधानमंत्री, लेखक, स्वतंत्रता सेनानी) जन्म 14 नवम्बर 1889, निधन 27 मई 1964 
7. 1957 में गोविंद वल्लभ पंत (स्वतंत्रता सेनानी, उप्र के पहले मुख्यमंत्री, देश के दूसरे गृहमंत्री) जन्म 10 सितम्बर 1857, निधन 7 मार्च 1961
8. 1957 में डॉ. धोंडो केशव कर्वे (शिक्षक और समाज सुधारक) जन्म 18 अप्रैल 1887, निधन 9 नवम्बर 1962)
9.1958 में डॉ. बिधान चन्द्र राय (चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री) 1 जुलाई 1882, निधन 1 जुलाई 1962
10. 1961 में पुरुषोत्तम दास टंडन (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शिक्षक) जन्म 1 अगस्त 1882, निधन 1 जुलाई 1962

11. 1961 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (प्रथम राष्ट्रपति, स्वतंत्रता सेनानी, विधिवेत्ता) जन्म 3 दिसम्बर 1884, निधन 28 फरवरी 1963 
12. 1963 में डॉ. जाकिर हुसैन (देश के तृतीय राष्ट्रपति) जन्म 8 फरवरी 1897, निधन 3 मई 1969
13.1963 में डॉ. पांडुरंग वामन काणे (भारतविद और संस्कृत के विद्वान) जन्म 1880, निधन 1972
14. 1966 में लाल बहादुर शास्त्री (देश के तीसरे प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, जन्म 2 अक्टूबर 1904, निधन 11 जनवरी 1966
15.1971 में इंदिरा गांधी (देश की चौथी प्रधानमंत्री) जन्म 19 नवम्बर 1917, निधन 31 अक्टूबर 1984

16. 1975 में वराहगिरी वेंकट गिरी (देश के चौथे राष्ट्रपति, श्रमिक संघवादी), जन्म 10 अगस्त 1894, निधन 23 जून 1980 
17. 1976 में के. कामराज (स्वतंत्रता सेनानी, मुख्यमंत्री मद्रास), मरणोपरान्त, जन्म 15 जुलाई 1903,‍ निधन 1975
18. 1980 में मदर टेरेसा (नोबेल पुरस्कार विजेता, कैथोलिक नन, मिशनरीज़ संस्थापक) जन्म 26 अगस्त 1910, निधन 5 सितम्बर 1997
19. 1983 में आचार्य विनोबा भावे (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, समाज सुधारक), मरणोपरान्त, जन्म 11 सितम्बर 1895, निधन 15 नवम्बर 1962
20. 1987 में खान अब्दुल गफ्फार खान (स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम अभारतीय) जन्म 20 जनवरी 1890, निधन 1988

21. 1988 में मरुदुर गोपाला रामचन्दम (अभिनेता, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री), एमजीआर को मरणोपरान्त, जन्म 17 जनवरी 1917, निधन 24 दिसम्बर 1987
22. 1990 में डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर (भारतीय संविधान के वास्तुकार, राज‍नीतिज्ञ, अर्थशास्त्री) मरणोपरान्त, जन्म 14 अप्रैल 1891, निधन 6 दिसम्बर 1987
23. 1990 में नेल्सन मंडला (नोबेल पुरस्कार विजेता, रंगभेद विरोधी आंदोलन के नेता) जन्म 18 जुलाई 1918, निधन 5 दिसम्बर 2013
24. 1991 में राजीव गांधी (देश के सातवें प्रधानमंत्री) मरणोपरान्त, जन्म 20 अगस्त 1944, निधन 21 मई 1991
25. 1991 में सरदार वल्लभ भाई पटेल (देश के पहले गृहमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी), मरणोपरान्त, जन्म 31 अक्टूबर 1875, निधन 15 दिसम्बर 1950
26. 1991 में मोरारजी भाई देसाई (देश के पांचवें प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) जन्म 29 फरवरी 1896, निधन 10 अप्रैल 1995
27. 1992 में मौलाना अबुल कलाम आजाद (देश के प्रथम शिक्षा मंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) मरणोपरान्त, जन्म 11 नवम्बर 1888, निधन 22 फरवरी 1958
28. 1992 में जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (जेआरडी टाटा), (देश के जाने माने उद्योगपति) मरणोपरान्त, जन्म 29 जुलाई 1904, निधन 29. नवम्बर 1993
29. 1992 में सत्यजीत रे (फिल्म निर्माता, निर्देशक) जन्म 2 मई 1921, निधन 23 अप्रैल 1992
30. 1997 में एपीजे अब्दुल कलाम (देश के 11वें राष्ट्रपति, वैज्ञानिक) जन्म 15 अक्टूबर 1931

31. 1997 में गुलजारीलाल नंदा (दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी) जन्म 4 जुलाई 1897, निधन 15 जनवरी 1998
32. 1997 में अरुणा आसिफ अली (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी), मरणोपरान्त, जन्म 16 जुलाई 1909, निधन 29 जुलाई 1996
33. 1998 में एमएस सुब्बालक्ष्मी (शास्त्रीय संगीत गायिका) जन्म 16 सितम्बर 1916, निधन 11 दिसम्बर 2004
34. 1998 में सी. सुब्रमण्यम (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कृषि मंत्री), जन्म 30 जनवरी 1910, निधन 7 नवम्बर 2000
35. 1998 में जयप्रकाश नारायण (स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ), मरणोपरान्त, जन्म 11 अक्टूबर 1902, निधन 8 अक्टूबर 1979
36. 1999 में पंडित रविशंकर (सितार वादक) जन्म 7 अप्रैल 1920, निधन 11 दिसम्बर 2012
37. 1999 में अमर्त्य सेन (नोबेल पुरस्कार विजेता, अर्थशास्त्री), जन्म 3 नवम्बर 1933 
38. 1999 में गोपीनाथ बोरदोलोई (स्वतंत्रता सेनानी, असम के मुख्यमंत्री), मरणोपरान्त, जन्म 1890, निधन 1950
39. 2001 में लता मंगेशकर (पार्श्व गायिका), जन्म 28 सितम्बर 1929 
40. 2001 में उस्ताद बिस्मिल्ला खां (शहनाई वादक) जन्म 21 मार्च 1916, निधन 21 अगस्त 2006
41. 2008 में पंडित भीमसेन जोशी (शास्त्रीय गायक) जन्म 4 फरवरी 1922, निधन 24 जनवरी 2011
42. 2014 में सचिन तेंडुलकर (भारतीय क्रिकेटर), जन्म 24 अप्रैल 1973
43. 2014 में सीएनआर राव (जाने-माने वैज्ञानिक व केमेस्ट्री के विशेषज्ञ ) , जन्म 30 जून 1934 
44.2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ( जाने-माने राजनेता), जन्म 25 दिसंबर 1924
45. 2014 में पं. मदनमोहन मालवीय ( शिक्षाविद, समाज सुधारक), जन्म, 25 दिसंबर 1861

 

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